Sun. Dec 5th, 2021

दोस्तों आप सभी ने ट्रेन मैं तो सफर किया ही होगा ट्रेन मै सफर करने के दौरान आपके मन मैं एक सवाल तो आता ही होगा कि, अगर चलती ट्रेन मे ट्रेन का ड्राईवर यानी की लोको पायलेट सो जाए तो किया होगा क्योंकि ट्रेन ड्राइवर भी मनुष्य है उसे भी नीद आ सकती है । अब आपको ऐसा ही लगेगा की ड्राईवर सो जाएगा तो ट्रेन दुर्घटना ग्रस्त हो जाएगी , आपका सोचना सही है लेकिन रेलवे ने इसका उपाय पहले ही खोज रखा है ।

सबसे पहले आपको बता दे की ट्रेन मैं ड्राइवर के साथ मैं असिस्टेंट ड्राइवर भी होता है यानी की असिस्टेंट लोको पायलेट भी होता है अगर ट्रेन का ड्राईवर सो जाता है या किसी वजह से बेहोश हो जाता है तो असिस्टेंट ड्राइवर उसे जगाएगा और अगर वो जागता नही है तो वो ट्रेन को अगले स्टेशन पर लाकर रोक देगा और इसके बारे मैं स्टेशन मास्टर को अवगत कराएगा , फिर स्टेशन मास्टर दूसरे ड्राइवर का इंतजाम करेगा ।

दोस्तो अब आपके दिमाग मैं एक और सवाल आ रहा होगा की अगर ड्राइवर और असिस्टेंट ड्राइवर दोनो ही सो जाते है तो फिर उस समय किया होगा , तो आपको बता दे की ऐसे स्थति से निपटने के लिए ट्रेन के इंजन में आई विसलेस कंट्रोल डिवाइस लगी होती है ये डिवाइस इस बात का ध्यान रखती है की अगर ट्रेन ने एक मिनट के अंदर स्पीड बढ़ाने के लिए थाडल को नही बढ़ाया या स्पीड घटाने के लिए थाडल को नही कम किया या ब्रेक नही लगाई या हॉर्न नही बजाया तो ये डिवाइस १७ सेकंड के अंदर एक ऑडियो विजुअल इंडेक्सि भेजता है तब ट्रेन ड्राइवर को एक बटन दबा कर उससे स्वीकार करना होता है और अपने एक्टिव होने का प्रमाण देना होता है अगर वो ऐसा नही करता है तो अगले १७ सेकंड के अंदर ट्रेन में ऑटोमैटिक ब्रेक लगना शुरू हो जाएगा और एक किलोमीटर के अंदर ट्रेन रुक जाऐगी।

तो इस तरह रेलवे किसी ड्राइवर के सोने या बेहोश होने से होने वाली ट्रेन दुर्घटना को रोकती है ।

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